
देहरादून:
उत्तराखंड के नागरिकों और मतदाताओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक खबर है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के निर्देश पर राज्य के सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण और अद्यतनीकरण के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस महा-अभियान के तहत 8 जून से 7 जुलाई 2026 तक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर हर एक वोटर का भौतिक सत्यापन करेंगे।
क्यों चलाया जा रहा है यह महा-अभियान?
इस सघन अभियान का प्राथमिक उद्देश्य 1 जनवरी 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर सभी नए और पात्र नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ना है। इसके साथ ही, सूची में मौजूद दोहरे या फर्जी नामों, मृत व्यक्तियों और राज्य से पलायन कर चुके लोगों के नाम हटाकर एक पूर्णतः त्रुटिहीन और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार की जाएगी। चुनाव आयोग इस बार डेटा को लेकर बेहद कड़ा रुख अपना रहा है।
9 लाख वोटरों पर क्यों है संशय?
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड के कुल करीब 79 लाख मतदाताओं में से 70 लाख लोगों का डेटा मैपिंग के जरिए पूरी तरह सुरक्षित और सत्यापित पाया गया है। हालांकि, एक बड़ी तकनीकी समस्या यह सामने आई है कि राज्य के लगभग 9 लाख ऐसे मतदाता हैं, जिनका वर्ष 2003 या उससे पहले का पुराना मूल मतदान रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
यदि गृह-सत्यापन के दौरान आपके पास भी साल 2003 का रिकॉर्ड नहीं मिलता है, तो आपको बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने इसका एक बेहद आसान और तार्किक समाधान निकाला है। इसके तहत आप अपने माता-पिता या दादा-दादी के मतों के विवरण के आधार पर सत्यापन करवा सकते हैं। यदि वह भी उपलब्ध न हो, तो आयोग द्वारा तय किए गए 12 अधिकृत कानूनी दस्तावेजों में से कोई भी एक साक्ष्य प्रस्तुत करके आप अपना वोट पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं।
8 जून से पहले तैयार रखें ये 12 दस्तावेज
पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान अपनी नागरिकता और निवास को प्रामाणिक रूप से स्थापित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने निम्नलिखित 12 दस्तावेजों को पूरी तरह वैध घोषित किया है:
- शासकीय सेवा पहचान पत्र: केंद्र सरकार, राज्य सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा कर्मचारियों को जारी आईडी कार्ड या पेंशन भुगतान आदेश (PPO)।
- विरासत दस्तावेज (Legacy Docs): 1 जुलाई 1987 से पहले सरकार, स्थानीय निकायों, राष्ट्रीयकृत बैंकों, डाकघर, एलआईसी या पीएसयू द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र या आधिकारिक प्रमाण पत्र।
- पहचान पत्र (आधार कार्ड)
- जन्म प्रमाण पत्र: नगर निकाय या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी।
- वैध पासपोर्ट (Indian Passport)
- शैक्षणिक प्रमाण पत्र: मान्यता प्राप्त शिक्षा बोर्ड (जैसे सीबीएसई, उत्तराखंड बोर्ड आदि) या विश्वविद्यालय द्वारा जारी 10वीं या उच्चतर स्तर का अंकपत्र/प्रमाण पत्र।
- स्थायी निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate): उत्तराखंड शासन के सक्षम राजस्व अधिकारी द्वारा जारी मूल निवास या स्थायी निवास पत्र।
- वन अधिकार प्रमाण पत्र
- वैध जाति प्रमाण पत्र: सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ओबीसी, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र।
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC): एनआरसी का वैध अंश या संदर्भ दस्तावेज।
- परिवार रजिस्टर की नकल: पंचायती राज विभाग या स्थानीय नागरिक निकायों द्वारा प्रमाणित परिवार रजिस्टर की प्रति।
- स्वामित्व/आवंटन प्रमाण पत्र: शासकीय संस्थाओं या राजस्व विभाग द्वारा जारी भूमि अथवा आवासीय मकान का वैध आवंटन पत्र।
क्या होगी घर-घर सत्यापन की पूरी प्रक्रिया?
- बीएलओ का आगमन: 8 जून से 7 जुलाई के बीच संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) आपके पंजीकृत आवास पर पहुंचेंगे।
- गणना प्रपत्र: बीएलओ आपको एक आधिकारिक फॉर्म देंगे, जिस पर बीएलओ का नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से अंकित होगा।
- विवरण और फोटो: इस फॉर्म में आपको अपने वर्तमान मत विवरण के साथ-साथ पूर्वजों/माता-पिता के मत की ऐतिहासिक जानकारी दर्ज करनी होगी और अपना एक नवीनतम रंगीन पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ चिपकाना होगा।
- रिकॉर्ड न होने पर नोटिस: यदि आपके पास वर्ष 2003 का कोई रिकॉर्ड नहीं है, तो प्रपत्र पर ‘अभिलेख अप्राप्य’ लिखकर बीएलओ को सौंप दें। इसके बाद मतदाता पंजीकरण अधिकारी कार्यालय द्वारा नियमानुसार नोटिस जारी कर आपसे साक्ष्य मांगे जाएंगे, जहां आप ऊपर बताए गए 12 कागजों में से कोई भी एक कागज जमा कर सकते हैं।
उत्तराखंड एसटीएफ (STF) का बड़ा अलर्ट: साइबर ठगों से सावधान!
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के शुरू होते ही राज्य में साइबर अपराधी भी सक्रिय हो गए हैं। उत्तराखंड एसटीएफ ने आम जनता के लिए एक बेहद जरूरी सुरक्षा चेतावनी जारी की है। कतिपय असामाजिक तत्वों द्वारा लोगों को फोन या मैसेज करके ‘वोटर लिस्ट से नाम काटने’ का भय दिखाया जा रहा है और वेरिफिकेशन के नाम पर नागरिकों से दूरभाष पर बैंक विवरण या ओटीपी (OTP) मांगने की शिकायतें मिली हैं।
निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि आयोग कभी भी फोन पर गोपनीय वित्तीय या व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगता है। समस्त सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह भौतिक रूप से आपके घर पर बीएलओ द्वारा या आयोग के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल के माध्यम से ही निष्पादित की जाएगी। किसी भी प्रकार के फोन कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें।
पाठक अपनी वर्तमान प्रविष्टि की प्रामाणिकता और मतदाता सूची में अपना नाम जांचने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड की आधिकारिक वेबसाइट ceo.uk.gov.in पर भी जा सकते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट: यूके साइबर न्यूज डेस्क


