गुलदार के आतंक पर फूटा जनता का आक्रोश वन विभाग की टीम को सुनाई खरीखोटी
पौड़ी के कमान्ध गांव में गुलदार का खूनी तांडव

पौड़ी गढ़वाल।
उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र में बीती रात गुलदार (तेंदुए) के हमले में एक और स्थानीय ग्रामीण की दर्दनाक मौत के बाद इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया है। घटना से आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीणों ने रात के अंधेरे में ही वन विभाग की टीम को मौके पर घेर लिया और जमकर खरी-खोटी सुनाई। इस तीखी बहस का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ग्रामीणों का दर्द और गुस्सा साफ देखा जा सकता है।
हम पौड़ी के अस्पताल में मरेंगे, तुम मेदान्ता में… पर मरना सबको है
वायरल वीडियो में एक स्थानीय युवक वन विभाग के अधिकारियों के सामने बेहद भावुक और आक्रामक अंदाज में सिस्टम की नाकामी पर सवाल उठाता नजर आ रहा है। युवक ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा, मरेंगे तो सभी इस दुनिया में, कोई नहीं बचेगा। हम भी मरेंगे और तुम भी मरोगे। तुम अपनी मौत मरोगे… शायद मेदान्ता हॉस्पिटल में, और हम मरेंगे पौड़ी के सरकारी अस्पताल में, लेकिन मरना सबको है।
9 मौतों के बाद भी महकमा सुस्त, उत्तराखंड राज्य आंदोलन का दिया हवाला
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में गुलदार के हमलों में अब तक 9 मासूम लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन वन विभाग का ढुलमुल रवैया जस का तस बना हुआ है। युवक ने अधिकारियों की संवेदनहीनता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी मौतों के बाद भी अधिकारी सिर्फ कागजी बहस कर रहे हैं।
बहस के दौरान क्षेत्रीय अस्मिता का मुद्दा भी गरमाया। युवक ने गुस्से में कहा, “यह उत्तराखंड राज्य हमने संघर्ष करके बनाया है, ताकि हमारे लोग सुरक्षित रह सकें। आज बाहर से आए लोग यहाँ विभागों में नौकरियां कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय जनता की जान की कोई कीमत नहीं है।”
मृतक के परिवार का दर्द: कल उसे दूध बेचने बाजार जाना था
घटना के बाद पीड़ित परिवार की सुध न लिए जाने और गुलदार को न पकड़े जाने से नाराज ग्रामीणों ने कहा कि जो व्यक्ति आज इस दुनिया में नहीं है, वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला जरिया था। युवक ने रोष जताते हुए कहा, “जो आदमी आज यहाँ मरा पड़ा है, कल सुबह उसे दूध बेचने बाजार जाना था ताकि उसके बाल-बच्चों का पेट पल सके। अगर इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी वन विभाग की आत्मा नहीं जाग रही है, तो इन्हें डूब मरना चाहिए।”
मुकदमा करना है तो कर दो, हम जेल जाने को तैयार
घंटों चली इस घेराबंदी के दौरान जब वन विभाग की तरफ से कानूनी कार्रवाई या सरकारी काम में बाधा डालने की बात आई, तो ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे मुकदमों से नहीं डरते। ग्रामीणों ने कहा, “अरे कर दो हमारे ऊपर एक-आध मुकदमा, हम भी चले जाएंगे दो-चार साल के लिए जेल! यहाँ गुलदार से मरने से तो अच्छा ही है।”
क्षेत्र में दहशत का माहौल, नरभक्षी घोषित करने की मांग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में कई गुलदार सक्रिय हैं, जिससे बच्चों का स्कूल जाना और महिलाओं का घास-लकड़ी के लिए जंगलों में जाना दूभर हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हमलावर गुलदार को तुरंत ‘नरभक्षी’ घोषित कर ढेर किया जाए या उसे पकड़कर पिंजरे में कैद किया जाए। जब तक क्षेत्र को सुरक्षित नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन और विरोध जारी रहेगा।



