नेताओं के झूठे वादों पर नारी शक्ति का करारा प्रहार: गुड़म गाँव में जनप्रतिनिधियों का बहिष्कार, खुद के श्रमदान से तैयार हो रहा भविष्य
थक-हारकर ग्रामीणों ने खुद उठाई कुदाल, बच्चों के लिए बना रहे खेल मैदान

चमोली,पोखरी
ग्राउंड ज़ीरो से विशेष रिपोर्ट:
उत्तराखंड राज्य की राजनीति में जिस विकासखण्ड ‘पोखरी’ का नाम बड़े अदब से लिया जाता रहा है, जिसे सूबे की सियासत का एक बड़ा केंद्र माना जाता रहा है, आज वहीं से विकास की एक ऐसी “वास्तविक तस्वीर” सामने आई है जो सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यह वही पोखरी क्षेत्र है, जिसने राज्य और देश को बार-बार विधायक, सांसद (MP), कद्दावर मंत्री और राष्ट्रीय दलों के प्रदेश अध्यक्ष दिए हैं। लेकिन अफसोस! दिग्गजों के इस गढ़ में आज धरातल पर विकास सिसक रहा है।
नेताओं की बेरुखी से थक चुके ग्रामीण:
विकासखण्ड पोखरी के अंतर्गत ग्राम सभा गुड़म के ग्रामीणों की कहानी किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर कर रख सकती है। ग्रामीण बताते हैं कि गाँव में बच्चों के लिए एक खेल मैदान की नितांत आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने ग्राम प्रधान से लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्य, विधायक और जिले के बड़े अधिकारियों तक, हर दरवाज़ा खटखटाया। बार-बार गुहार लगाई, ज्ञापन सौंपे, मिन्नतें कीं, लेकिन हर बार उन्हें केवल खोखले आश्वासन ही मिले।
जब सुनवाई नहीं हुई, तो ‘स्वावलंबन’ का मार्ग चुना:
नेताओं और अफ़सरों की लालफीताशाही और बेरुखी से थक-हारकर, गुड़म गाँव के लोगों ने अब एक बड़ा और साहसिक संकल्प लिया है। उन्होंने तय किया कि वे अब किसी जनप्रतिनिधि के आगे हाथ नहीं फैलाएंगे, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य के लिए खेल मैदान “खुद” तैयार करेंगे। यह फैसला कोई आसान नहीं था, लेकिन गाँव वालों के स्वाभिमान और बच्चों के प्रति उनके प्रेम ने उन्हें यह कदम उठाने को मजबूर कर दिया।
नारी शक्ति और युवाओं का अभूतपूर्व श्रमदान:
पिछले कुछ दिनों से गुड़म गाँव में एक अद्भुत नज़ारा देखने को मिल रहा है। गाँव की नारी शक्ति (मातृशक्ति), युवा शक्ति और यहाँ तक कि बुजुर्ग भी, सुबह होते ही कुदाल, बेलचा और टोकरियाँ लेकर मैदान बनाने की जगह पर पहुँच जाते हैं। तपती धूप में भी उनका उत्साह कम नहीं होता। वे मिलकर पत्थरों को हटा रहे हैं, ज़मीन को समतल कर रहे हैं। यह सराहनीय, प्रेरणादायक और साहसिक कार्य पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। गाँव की एकता और दृढ़ संकल्प को देखकर हर कोई हतप्रभ है।
सोशल मीडिया के ‘विकास’ पर करारा जवाब:
गाँव वालों का यह स्वावलंबी कदम उन जनप्रतिनिधियों के मुँह पर एक करारा जवाब है, जो आजकल सोशल मीडिया पर केवल विकास “खोजने” और “दिखाने” में लगे हुए हैं। जहाँ एक तरफ पूर्व विधायक, वर्तमान विधायक और अन्य कई जनप्रतिनिधि फेसबुक और ट्विटर पर अपने द्वारा किए गए विकास कार्यों की लंबी-चौड़ी गाथाएँ सुनाने में व्यस्त हैं, वहीं गुड़म गाँव की यह कड़वी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है।
सवाल सिस्टम और दावों पर:
बड़ा सवाल यह है कि यदि वास्तव में धरातल पर इतना ही विकास हुआ होता, जैसा कि सोशल मीडिया पर दावा किया जाता है, तो आज गुड़म के ग्रामवासी इस प्रकार स्वयं आगे बढ़कर ऐसा कठोर कदम उठाने को मजबूर क्यों होते? यह एक कटु सच्चाई है कि जहाँ जनप्रतिनिधियों को जनता की मूल आवश्यकताओं को समझने और उन्हें पूरा करने के लिए आगे आना चाहिए था, वहाँ आज जनता को अपने बच्चों के खेल-कूद जैसे मौलिक अधिकार के लिए भी स्वयं श्रमदान करना पड़ रहा है।
गाँववासियों को नमन, नेताओं के लिए आईना:
हम ग्राम सभा गुड़म की मातृशक्ति, युवा शक्ति और समस्त ग्रामवासियों को हृदय से नमन करते हैं, जिन्होंने अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए स्वयं श्रमदान कर खेल मैदान बनाने का यह ऐतिहासिक संकल्प लिया। उनका यह संकल्प उन जनप्रतिनिधियों के लिए एक बड़ा आईना है, जो वर्षों से विकास के बड़े-बड़े दावे तो करते रहे, लेकिन हकीकत यह है कि गाँव आज भी अपनी मूल सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
UKD संगठन मंत्री ने बढ़ाया उत्साह:
इस अवसर पर उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) की संगठन मंत्री श्रीमती लक्ष्मी देवी जी ने भी गुड़म गाँव का दौरा किया और ग्रामीणों के इस अभूतपूर्व कार्य की सराहना की। उन्होंने सभी ग्रामवासियों से एकजुट होकर इस कार्य में सहयोग करने की अपील की और उनका उत्साहवर्धन किया। श्रीमती लक्ष्मी देवी जी ने सभी लोगों का धन्यवाद भी ज्ञापित किया कि उन्होंने स्वावलंबन की एक नई मिसाल पेश की है।
अब समय आ गया है बदलाव का:
गुड़म गाँव के इस घटनाक्रम ने पोखरी ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड में एक नई बहस छेड़ दी है। अब समय आ गया है कि ग्रामवासी ऐसे नेताओं की पहचान करें और उनका कड़ा बहिष्कार करें, जो केवल चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद विकास को भूल जाते हैं। जनता को समझ आ गया है कि उनका असली विकास उनके अपने हाथों में है।
इस रिपोर्ट के लिए जानकारी, फोटो और वीडियो स्थानीय जागरूक निवासी श्री गिरीश नेगी जी द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं। उनके इस सक्रिय सहयोग और जनहित के प्रति उनकी सजगता के लिए हम उनके हृदय से आभारी हैं।



