राजधानी में जीरो टॉलरेंस फेल बालावाला में गुणवत्ता विहीन सड़क निर्माण का लाइव पर्दाफाश!
पैरों से उखड़ रही है नई नवेली सड़क!

गैस गोदाम मार्ग पर जनता के पैसे की सरेआम बर्बादी यूके साइबर न्यूज़ के कैमरे पर खुली डामरीकरण की पोल, पहली गाड़ी चलने से पहले ही उखड़ने लगी परतें
देहरादून (यूके साइबर न्यूज़)।
उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून में विकास के नाम पर सरकारी धन को ठिकाने लगाने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। मामला बालावाला क्षेत्र के मुख्य मार्ग का है, जहाँ विभागीय अनदेखी के चलते सड़क निर्माण को मजाक बनाकर रख दिया गया है।
’यूके साइबर न्यूज़’ की ग्राउंड रिपोर्ट में सड़क निर्माण की खराब गुणवत्ता का ऐसा लाइव सबूत कैद हुआ है, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए। लाखों रुपये की लागत से बनाई जा रही चमचमाती सड़क गाड़ियों का बोझ तो दूर, इंसान के पैर की मामूली रगड़ भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। पैर से थोड़ा सा रगड़ते ही डामर पपड़ी की तरह उखड़ रहा है और नीचे से सिर्फ और सिर्फ गीली मिट्टी बाहर आ रही है।
कुंभकर्णी नींद में सोया रहा प्रशासन, मॉनसून आते ही जागी चेतना
स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि पूरी गर्मियों भर इस सड़क से उड़ने वाली धूल के गुबार ने उनका जीना मुहाल कर रखा था। आस-पास के घरों और दुकानों में धूल की मोटी परतें जम रही थीं, जिससे लोग बीमार हो रहे थे, लेकिन तब शासन-प्रशासन सुध लेने को तैयार नहीं था।
अब जब मॉनसून सिर पर है और पिछले दो-चार दिनों की शुरुआती प्री-मॉनसून बारिश में ही पूरी सड़क तालाब बन गई, तो आनन-फानन में यहाँ डामरीकरण (Grouting) का काम शुरू कर दिया गया। लेकिन ग्राउंड जीरो के हालात देखकर साफ है कि यह काम जनता को राहत देने के लिए नहीं, बल्कि महज़ ‘लीपापोती’ के लिए किया जा रहा है।
नियमों को ठेंगे पर रख पुरानी सड़क पर बिछा दी मिट्टी
’यूके साइबर न्यूज़’ के वरिष्ठ संवाददाता प्रेम पडियार ने जब ग्राउंड जीरो पर निर्माण कार्य की बारीकियों को कैमरे के सामने खंगाला, तो जिम्मेदार तंत्र के दावों की हवा निकल गई। सड़क बनाने के स्थापित नियम-कायदों को ताक पर रखकर, पुरानी डामर वाली सड़क के ऊपर ही सीधे कंकड़-पत्थर (गिट्टी) और मिट्टी डाल दी गई। इसके ऊपर डामर (कोलतार) की इतनी पतली और घटिया लेयर चढ़ाई गई है कि वह अभी से जगह-जगह से धंसने लगी है। दोपहिया वाहनों के टायरों के निशान से सड़क पर अभी से निशान पड़ने शुरू हो गए हैं।
गैस गोदाम मार्ग: भारी वाहनों का दबाव, एक हफ्ता भी टिकना नामुमकिन
बालावाला का यह मार्ग बेहद संवेदनशील और व्यस्त है। इसी मार्ग पर गैस गोदाम स्थित होने के कारण दिन-रात भारी-भरकम एलपीजी सिलेंडरों से लदे कमर्शियल ट्रकों की आवाजाही लगी रहती है। अब सवाल यह उठता है कि जो सड़क इंसान के चलने मात्र से उखड़ रही है, वह टनों भारी ट्रकों का वजन कैसे सहेगी? स्थानीय जनता का साफ कहना है कि यह सड़क एक हफ्ता भी नहीं टिकने वाली और पहली ही तेज बारिश में बह जाएगी। यह सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे की सरेआम बर्बादी है।
जब राजधानी का यह हाल, तो पहाड़ों में क्या होता होगा?
यह पूरा मामला उस वीआईपी शहर देहरादून का है जहाँ सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री स्वयं बैठते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था के सर्वोच्च शिखर पर आसीन महामहिम राज्यपाल का भी राजभवन है। जब मुख्यमंत्री और मंत्रियों की नाक के नीचे राजधानी के भीतर निर्माण कार्यों का यह आलम है, तो उत्तराखंड के दूरदराज के पहाड़ी, सीमांत और ग्रामीण इलाकों में चल रहे विकास कार्यों की क्या दुर्गति होती होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
बालावाला की जनता ने अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने और इस घटिया निर्माण कार्य के पीछे जिम्मेदार विभागीय इंजीनियरों व संबंधितों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
डिस्क्लेमर:
यह समाचार ‘यूके साइबर न्यूज़’ के संवाददाता प्रेम पडियार द्वारा बालावाला क्षेत्र से की गई प्रत्यक्ष ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग, मौके पर विजुअल्स में दिख रही सड़क की वास्तविक स्थिति पर आधारित है। हमारा उद्देश्य किसी भी संस्था या व्यक्ति विशेष की छवि को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित में विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को उजागर करना है।



