उत्तराखण्ड के लिए बहुत दर्द दे गया 2025।

वर्ष 2025 उत्तराखंड के लिए प्राकृतिक और मानवीय आपदाओं के दृष्टिकोण से काफी पीड़ादायक रहा। इस वर्ष राज्य ने कई ऐसी घटनाओं का सामना किया, जिन्होंने जान-माल का भारी नुकसान किया। वर्ष 2025 की प्रमुख दुखद घटनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. उत्तरकाशी जिले के धराली में आपदा:
5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी जिले के धराली और हर्षिल क्षेत्र में भीषण आपदा आई। इसे शुरुआत में ‘बादल फटना’ माना गया, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार यह ग्लेशियर के टूटने या ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड का परिणाम भी हो सकता है।इस आपदा में खीर गंगा नदी उफान पर आ गई, जिससे धराली का बाजार, कई होटल और घर पूरी तरह तबाह हो गए। लगभग 70 (सरकारी आंकड़े) से अधिक लोग मारे गए या लापता हो गए, जिनमें 11 सेना के जवान भी शामिल थे।
2. देहरादून और मसूरी में तबाही:
सितंबर के मध्य (15-16 सितंबर) को राजधानी देहरादून और मसूरी में मूसलाधार बारिश ने कहर बरपाया।सहस्त्रधारा, मालदेवता और टपकेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। सहस्त्रधारा में 192 mm तक बारिश दर्ज की गई। कई घर और दुकानें बह गईं और लगभग 15 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य लापता हो गए।
3. अल्मोड़ा जिले में बस दुर्घटना:
वर्ष के अंत में 30 दिसंबर को अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक यात्री बस अनियंत्रित होकर लगभग 500 फीट गहरी खाई में गिर गई। इस हादसे में 7 यात्रियों की मौत हो गई और 12 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए।
4. चमोली टनल हादसा:
30 दिसंबर की रात को चमोली जिले के विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरंग के अंदर दो लोको ट्रेनों की टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में टनल के अंदर काम कर रहे लगभग 86 मजदूर और कर्मचारी घायल हुए, जिन्हें चमोली और पीपलकोटी के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
इन खबरों के साथ साथ उत्तराखण्ड में राजनीतिक हलचल भी बड़े स्तर पर रही जिसमें विधानसभा में विवादित बयान देने के दबाव में आकर कैबिनेट मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल को अपने पद को छोड़ना पड़ा। ऋषिकेश में भी वर्ष 2025 में जमकर बबाल हुआ जिसमें खारा स्रोत शराब की दुकान के पास एक युवक की हत्या के बाद खूब बबाल हुआ था और गुमानीवाला के पास दिसंबर में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को खाली करने के कारण जमकर पत्थरबाजी मुख्य रहे। अंकिता हत्या का मामला भी पूरे राज्य में फिर से सुर्खियों में रहा जिसमें एक उर्मिला नाम की महिला के बयान के बाद तूल पकड़ लिया जिसमें विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा।
पहाड़ी जिलों में जंगली जानवरों (भालू और बाघ) ने जमकर आतंक मचा रखा है जिसे सैकड़ों लोग घायल हुए तथा साथ ही लगभग 50 लोगों की मृत्यु हो गई। भालुओं ने सैकड़ों मवेशियों को भी अपना शिकार बनाया



