NEET विवाद और प्रधान के इस्तीफे के बाद Pralhad Joshi को मिली बड़ी जिम्मेदारी, जानिए कौन हैं नए शिक्षा मंत्री
पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन, कड़े प्रशासक माने जाने वाले प्रल्हाद जोशी को बनाया नया शिक्षा मंत्री; क्या अब परीक्षाओं में रुकेगी धांधली?
नई दिल्ली 25 जुलाई 2026
देशभर में NEET-UG परीक्षा धांधली, पेपर लीक विवाद और लगातार बढ़ते छात्र आक्रोश के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फेरबदल किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अपने पद से इस्तीफे के तुरंत बाद सरकार ने वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का नया प्रभार सौंपा है।
राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की साख और पारदर्शी व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रल्हाद जोशी की यह नियुक्ति अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कौन हैं प्रल्हाद जोशी, क्या है उनका राजनीतिक सफर और शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालते ही उनके सामने कौन सी बड़ी चुनौतियां होंगी।
कौन हैं प्रल्हाद जोशी? (राजनीतिक पृष्ठभूमि और पहचान)
27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा में जन्मे प्रल्हाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के बेहद अनुभवी और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं। राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले उन्होंने हुबली के के.एस. आर्ट्स कॉलेज (कर्नाटक यूनिवर्सिटी) से बी.ए. की डिग्री हासिल की और एक व्यवसायी के रूप में कार्य किया।
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5 बार के सांसद: प्रल्हाद जोशी कर्नाटक की धारवाड़ (Dharwad) लोकसभा सीट से लगातार 5वीं बार (2004, 2009, 2014, 2019 और 2024) चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं।
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संगठन में मजबूत पकड़: बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे जोशी वर्ष 2012 से 2016 तक कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं।
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संसदीय कार्य में महारत: मोदी सरकार 2.0 (2019-2024) के दौरान उन्होंने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई थी। संसद सत्र के दौरान फ्लोर मैनेजमेंट और विपक्ष के साथ समन्वय बनाने में उन्हें विशेषज्ञ माना जाता है।
ऐतिहासिक आंदोलन जिससे मिली राष्ट्रीय पहचान
प्रल्हाद जोशी का नाम 1990 के दशक में उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया था, जब उन्होंने कर्नाटक के हुबली ईदगाह मैदान में राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराने को लेकर चले बड़े राष्ट्रवादी आंदोलन का नेतृत्व किया था। इस आंदोलन ने उन्हें राज्य के साथ-साथ केंद्र स्तर पर भी एक प्रखर नेता के रूप में स्थापित किया। इसके अलावा उन्होंने 90 के दशक में ‘कश्मीर बचाओ आंदोलन’ में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी।
नए शिक्षा मंत्री के सामने क्या होंगी 3 बड़ी चुनौतियां?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालना प्रल्हाद जोशी के लिए किसी कांटों भरे ताज से कम नहीं है। पद संभालते ही उनके सामने मुख्य रूप से तीन बड़ी चुनौतियां होंगी:
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NTA और परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल सुधार: NEET, UGC-NET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कामकाज का पुनर्मूल्यांकन करना।
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छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बहाल करना: पेपर लीक की खबरों से हतोत्साहित हुए देश के लाखों परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों के भीतर व्यवस्था के प्रति भरोसा कायम करना।
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भविष्य में धांधली पर पूर्ण अंकुश: डिजिटल तकनीक और कड़े कानूनों के जरिए परीक्षा केंद्रों पर होने वाली गड़बड़ियों और लीक गिरोहों पर नकेल कसना।
क्या होगा आगे?
प्रल्हाद जोशी की पहचान एक कड़े प्रशासक और शांत रणनीतिकार की रही है। मोदी सरकार 3.0 में उपभोक्ता मामले, खाद्य व नवीकरणीय ऊर्जा जैसे विभागों के साथ अब शिक्षा मंत्रालय की यह अतिरिक्त जिम्मेदारी उनके राजनीतिक करियर का एक बड़ा टेस्ट साबित होगी। अब देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वे परीक्षा सुधारों को लेकर क्या कड़े कदम उठाते हैं।



