
नई दिल्ली:
भारत सरकार ने देश की बिजली व्यवस्था (ग्रिड) को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) कंपनियों के लिए नियमों को कड़ा कर दिया है। सरकार ने घोषणा की है कि जो पवन और सौर ऊर्जा उत्पादक अपनी निर्धारित बिजली आपूर्ति की सीमा (Supply Pledge) का पालन नहीं करेंगे, उन पर लगाए जाने वाले जुर्माने (Penalties) में भारी बढ़ोतरी की जाएगी।
क्यों सख्त हुए नियम?
बिजली मंत्रालय का यह कदम ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। सौर और पवन ऊर्जा पूरी तरह मौसम पर निर्भर होती है, जिससे बिजली उत्पादन में अचानक उतार-चढ़ाव आने का खतरा रहता है। यदि कोई कंपनी उतनी बिजली नहीं देती जितनी उसने तय की है, तो इससे पूरे देश के पावर ग्रिड पर दबाव पड़ता है और ब्लैकआउट जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
कंपनियों को सुधारनी होगी अपनी तकनीक
नए नियमों के तहत, अब ऊर्जा कंपनियों को अत्याधुनिक ‘फोरकास्टिंग’ (पूर्वानुमान) तकनीकों का उपयोग करना होगा। उन्हें पहले से सटीक जानकारी देनी होगी कि वे अगले दिन या घंटों में कितनी बिजली ग्रिड को देंगे। अगर वास्तविक सप्लाई और किए गए वादे में बड़ा अंतर (Deviation) पाया जाता है, तो भारी पेनल्टी देनी होगी।
ग्रिड सुरक्षा सर्वोपरि
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे भारत कोयले से हटकर क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ग्रिड का अनुशासन बनाए रखना बेहद जरूरी है। यह फैसला कंपनियों को अधिक जिम्मेदार बनाने और देश की बिजली व्यवस्था को बिना किसी रुकावट के चलाने में मदद करेगा।



