LPG का शॉर्ट सर्किट: सिलेंडर के लिए गोदामों पर जंग, OTP के खेल ने बिगाड़ा रसोई का बजट
क्या बिजली का चूल्हा है असली समाधान?

देहरादून/उत्तराखंड | विशेष ग्राउंड रिपोर्ट | UK Cyber News
[दिनांक: 06 अप्रैल 2026]
उत्तराखंड के घर-घर में इन दिनों रसोई गैस को लेकर ‘हाहाकार’ मचा है। वैश्विक स्तर पर जारी जंग और सप्लाई चेन टूटने का सीधा असर अब आम आदमी की थाली पर दिख रहा है। जहाँ एक तरफ सिलेंडर की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘डिजिटल इंडिया’ का OTP सिस्टम उपभोक्ताओं के पसीने छुड़ा रहा है।
जमीनी हकीकत: डिजिटल बुकिंग फेल, मैनुअल लाइन पास
UK Cyber News की पड़ताल में सामने आया कि प्रदेश के कई जिलों में गैस बुकिंग का ऑनलाइन पोर्टल जवाब दे चुका है।
- OTP का इंतजार: उपभोक्ता बुकिंग तो कर रहे हैं, लेकिन मोबाइल पर OTP आने में घंटों लग रहे हैं।
- गोदामों पर ‘कुरुक्षेत्र’: देहरादून के रायपुर, बालावाला और नकरांदा जैसे इलाकों में सुबह 5 बजे से ही लोग सिलेंडर की खाली टंकी लेकर लाइनों में लगे हैं। दिहाड़ी छोड़कर लाइन में खड़े व्यक्ति का कहना है, “साहब, फोन पर बुकिंग होती नहीं और यहाँ नंबर आता नहीं।”
विकल्प की तलाश: इंडक्शन और इंफ्रारेड का पोस्टमार्टम
गैस की इस किल्लत ने बिजली के चूल्हों के बाजार को गर्म कर दिया है। लेकिन आम आदमी उलझन में है कि कौन सा चूल्हा जेब पर हल्का पड़ेगा? आइए समझते हैं इनका गणित:
1. इंडक्शन (Induction): स्मार्ट चॉइस या सिरदर्द?
- करंट का सच: यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक पर काम करता है, जो सीधे बर्तन को गर्म करती है।
- फायदा: यह गैस के मुकाबले 30% तक सस्ता पड़ता है। अगर 1 घंटा चलाएं तो मात्र 1 से 1.5 यूनिट बिजली लेता है।
- पेच: इस पर आपके पुराने एल्युमिनियम या मिट्टी के बर्तन नहीं चलेंगे। आपको ‘इंडक्शन बेस’ वाले स्टील के बर्तनों में निवेश करना होगा।
2. इंफ्रारेड (Infrared): सुविधा बड़ी या बिल?
- करंट का सच: इसमें हीटिंग कॉइल लाल होकर गर्मी छोड़ती है।
- फायदा: सबसे बड़ी राहत यह है कि इस पर घर का कोई भी पुराना बर्तन (मिट्टी का तवा, कढ़ाई, पतीला) चल जाता है।
- नुकसान: यह बिजली का ‘दुश्मन’ है। इंडक्शन के मुकाबले यह 40% ज्यादा बिजली फूँकता है। महीने के अंत में बिजली का बिल आपको करंट मार सकता है।
एक्सपर्ट की राय
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आप LPG/PNG की किल्लत से स्थाई आजादी चाहते हैं, तो इंडक्शन सबसे बेहतर लॉन्ग-टर्म निवेश है। भले ही शुरू में बर्तन खरीदने का खर्चा हो, लेकिन बिजली बिल की बचत उसे 6 महीने में वसूल कर देगी। वहीं, इंफ्रारेड केवल इमरजेंसी बैकअप के लिए ही ठीक है।
UK Cyber News की सीधी बात: सरकार और एजेंसियां सप्लाई सुधारने के दावे तो कर रही हैं, लेकिन धरातल पर जनता ‘लाइन’ और ‘ऑनलाइन’ के बीच पिस रही है। जब तक जंग और सप्लाई का संकट है, तब तक अपनी रसोई में एक ‘इलेक्ट्रिक बैकअप’ रखना ही समझदारी है।



