गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग,देहरादून में बुद्धि-शुद्धि यज्ञ के जरिए सरकार को जगाने की कोशिश
एकता विहार धरना स्थल से मुखर होते आंदोलनकारी

देहरादून।एकता विहार:
उत्तराखंड की स्थायी राजधानी के मुद्दे पर एक बार फिर आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। देहरादून के एकता विहार स्थित धरना स्थल पर आज एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। राजधानी गैरसैंण के मुद्दे पर मुखर रहने वाले पूर्व आई.ए.एस विनोद प्रसाद रतूड़ी जी व अन्य आंदोलनकारियों ने सरकार की “बुद्धि-शुद्धि” के लिए सामूहिक यज्ञ का आयोजन किया।
26 साल का इंतजार और सरकार की चुप्पी
यज्ञ के दौरान मौजूद वक्ताओं और आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। धरना स्थल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड राज्य बने ढाई दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन आज भी गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं मिल पाया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकारें आती-जाती रहीं, लेकिन पहाड़ की जनभावनाओं से जुड़े इस मुद्दे पर केवल राजनीति होती रही है।
पूर्व आईएएस अधिकारी का समर्थन
इस आयोजन में विशेष रूप से पूर्व आईएएस अधिकारी और गैरसैंण के मुद्दे पर लगातार आवाज उठाने वाले श्री विनोद प्रसाद रतूड़ी जी के सानिध्य में मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दी गईं और ईश्वर से प्रार्थना की गई कि सत्ता में बैठे लोगों को सद्बुद्धि मिले ताकि वे उत्तराखंड की मूल अवधारणा और जनभावनाओं के अनुरूप गैरसैंण को पूर्णकालिक राजधानी घोषित करें।
आंदोलन की नई रणनीति
एकता विहार में जुटे प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि यह ‘बुद्धि-शुद्धि यज्ञ’ केवल एक सांकेतिक विरोध नहीं है, बल्कि सरकार को आखिरी चेतावनी है। यदि जल्द ही गैरसैंण पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेश भर के लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: एकता विहार धरना स्थल, देहरादून।
- मुख्य आयोजन: बुद्धि-शुद्धि यज्ञ और सामूहिक प्रार्थना।
- प्रमुख मांग: गैरसैंण को अविलंब उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित करना।
- सहभागिता: विभिन्न सामाजिक संगठन, पूर्व नौकरशाह और राज्य आंदोलनकारी।
पहाड़ की इस सबसे बड़ी लड़ाई में अब देखना यह होगा कि इस ‘बुद्धि-शुद्धि’ यज्ञ का असर सरकार के नीति-निर्धारकों पर कितना पड़ता है।
रिपोर्ट: प्रेम पडियार, UK Cyber News



