विकास के नाम पर एक बार फिर प्रकृति का विनाश।
चम्पावत में सड़क निर्माण पर कुर्बान होंगे हजारों पेड़।

चम्पावत/यूके साइबर न्यूज/। काली कुमाऊं के नाम से प्रसिद्ध चम्पावत जिला मुख्यालय को ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए यह 9.87 किलोमीटर लंबा बाईपास मार्ग प्रस्तावित है। इस पूरी परियोजना पर लगभग ₹220.80 करोड़ का खर्च आने का अनुमान है, यह बाईपास लगभग 10 किमी लंबा होगा। यह बाईपास टनकपुर रोड पर मुड़ियानी से शुरू होकर चैकुनीबोरा, चैकुनी पांडेय, कफलांग, शक्तिपुरबुंगा, दुधपोखरा और नगरगांव होते हुए तिलौन तक बनाया जाएगा। इसमें कुल 7 पुल और 69 कलवर्ट का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।
विकास की इस राह में पर्यावरणीय क्षति को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। वन विभाग ने बाईपास के मार्ग में आने वाले 1882 पेड़ों का चिह्नीकरण पूरा कर लिया है। कटने वाले पेड़ों में देवदार, बांज, चीड़ और उतीस जैसी महत्वपूर्ण पहाड़ी प्रजातियां शामिल हैं। इस परियोजना के लिए लगभग 8.94 हेक्टेयर वन भूमि और 12.78 हेक्टेयर निजी भूमि का उपयोग होगा। प्रभावित ग्रामीणों और जमीन स्वामियों को मुआवजे का वितरण पहले ही शुरू किया जा चुका है। चम्पावत शहर के बीचों-बीच से गुजरने वाले भारी वाहनों के लिए यह एक वैकल्पिक मार्ग होगा, जिससे शहर में आए दिन लगने वाले जाम से राहत मिलेगी। राष्ट्रीय राजमार्ग खंड ने इस काम के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
जहाँ एक ओर यह बाईपास स्थानीय अर्थव्यवस्था और यातायात के लिए वरदान माना जा रहा है, वहीं इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के कटान को लेकर पर्यावरण प्रेमी “विकास बनाम प्रकृति” के संतुलन पर सवाल भी उठा रहे हैं।



