कविता
संसद से सड़क तक… अनवरत जारी है ‘धूमिल’ का सवाल”
सुदामा पांडेय 'धूमिल' की पुण्यतिथि पर एक छोटी सी कोशिश।

ग़ज़ल (धूमिल-स्टाइल)
रोटी यहाँ न कविता है, न कोई त्योहार है
यह पेट का सवाल है, यह सीधा इन्कार है
जो हल न चलाए खेत में, जो धूप न सह पाए
वही बता रहा है मुल्क को, लोकतंत्र क्या यार है
माइक के पीछे खड़ा आदमी भूखा नहीं होता
उसकी हर बात में बस कुर्सी का व्यापार है
शब्दों से पेट नहीं भरता, ये सच है साहब
भाषण से ज़्यादा ज़रूरी आज चूल्हे की आग है
मैं पूछता हूँ संसद से – रोटी कहाँ गई?
जवाब में आती है ख़ामोशी, यही सरकार है



