सीधे सवाल, बेबाक जवाब: बद्रीनाथ विधानसभा को लेकर पहली बार खुलकर बोले डॉ. उदय सिंह रावत!
क्या शिक्षाविदों का विज़न बदल पाएगा पहाड़ की सियासी तस्वीर?

देहरादून:
उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) में शामिल होने के बाद, पूर्व कुलपति डॉ. उदय सिंह रावत ने बद्रीनाथ विधानसभा को लेकर अपनी रणनीति और विज़न को स्पष्ट करना शुरू कर दिया है। ‘तीतर न्यूज़‘ के पॉडकास्ट में एक विस्तृत चर्चा के दौरान, उन्होंने उन जमीनी सवालों के जवाब दिए जो आज बद्रीनाथ विधानसभा का हर नौजवान और स्थानीय निवासी पूछ रहा है।
गोपेश्वर कैंपस और शिक्षा की बदहाली पर बेबाकी:
जब डॉ. रावत से उनके कुलपति रहते हुए गोपेश्वर कैंपस की स्थिति पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि कैंपस को विश्वविद्यालय का स्वरूप देने के लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी रही। उन्होंने वादा किया कि यदि उन्हें जनमानस का मौका मिलता है, तो वे बद्रीनाथ विधानसभा के हर ब्लॉक (पोखरी, जोशीमठ, थराली) में शिक्षा की गुणवत्ता और इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देंगे।
पलायन और रोजगार का ‘रावत मॉडल’:
पहाड़ से पलायन के सबसे बड़े कारण ‘बेरोजगारी’ पर डॉ. रावत ने कहा कि वे केंद्र और राज्य की वर्तमान नीतियों से असंतुष्ट हैं। उन्होंने टेंडर पॉलिसी में बदलाव का प्रस्ताव दिया। उनका मानना है कि जब तक बड़े निर्माण कार्यों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी नहीं होगी, तब तक रोजगार के अवसर पैदा नहीं होंगे। उन्होंने टेंडर की राशि और शर्तों में ‘स्थानीय प्राथमिकता’ (Local Preference) लागू करने की वकालत की है।
नारी शक्ति के लिए विशेष घोषणा:
डॉ. रावत ने पहाड़ों में महिलाओं के दिन-प्रतिदिन के संघर्ष पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उनका विज़न महिलाओं के लिए ‘चारा-घास प्रबंधन’ की सरकारी व्यवस्था करना है, ताकि उन्हें हर सुबह मीलों दूर जंगल के जोखिम से बचाया जा सके। यह एक ऐसी योजना है जिसे वे एनजीओ और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों के जरिए धरातल पर उतारना चाहते हैं।
चुनौतियों पर क्या बोले पूर्व कुलपति?
बद्रीनाथ के दिग्गज राजनीतिक चेहरों के सामने अपनी नई पारी पर उन्होंने कहा, “राजनीति में कद या चेहरा नहीं, बल्कि विचारधारा मायने रखती है।” उन्होंने साफ किया कि वे टिकट के मोहताज होकर नहीं, बल्कि पहाड़ की अस्मिता और उत्तराखंड क्रांति दल के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुँचाने के मिशन पर निकले हैं।



