
देहरादून। राजधानी देहरादून को ऋषिकेश, हरिद्वार और जौलीग्रांट एयरपोर्ट से जोड़ने वाले मुख्य पड़ाव, लच्छीवाला टोल प्लाजा पर सफर करना अब और महंगा होने जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 1 अप्रैल 2026 से नई टोल दरों को लागू करने का फैसला किया है। लेकिन इस मूल्य वृद्धि के साथ ही टोल कर्मियों के व्यवहार और नियमों की अनदेखी को लेकर जनता में भारी आक्रोश है।
1. नई टोल दरें: एक नजर में (1 अप्रैल 2026 से प्रभावी)
नीचे दी गई तालिका में विभिन्न वाहनों के लिए बढ़ी हुई संभावित दरों का विवरण है:
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वाहन की श्रेणी |
पुरानी दर (एक तरफ) |
नई दर (1 अप्रैल से) |
मासिक पास (20 किमी दायरा) |
|---|---|---|---|
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कार / जीप / वैन |
₹105 |
₹110 |
₹350 (पहले ₹340 था) |
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हल्के व्यावसायिक वाहन |
₹170 |
₹175 |
₹5,790 |
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बस / ट्रक (2 एक्सल) |
₹355 |
₹365 |
₹11,775 |
(ये दरें NHAI द्वारा प्रस्तावित वार्षिक वृद्धि के आधार पर संभावित हैं। आधिकारिक दरों की अंतिम सूची 31 मार्च की रात को NHAI द्वारा जारी की जाएगी।)
2. नियमों की बलि: कहाँ गया 100 मीटर और 10 सेकंड’ का कानून?
NHAI के स्पष्ट नियम हैं कि टोल प्लाजा पर जनता को असुविधा नहीं होनी चाहिए, लेकिन लच्छीवाला में स्थिति इसके उलट है:
- पीली लाइन (Yellow Line) का नियम: नियम कहता है कि यदि वाहनों की कतार 100 मीटर से लंबी हो जाए, तो पीली लाइन पार करने वाले वाहनों को बिना टोल दिए जाने देना चाहिए। यहाँ अक्सर जाम जौलीग्रांट तक पहुँच जाता है, फिर भी एक-एक रुपया वसूलने के लिए जनता को घंटों खड़ा रखा जाता है।
- प्रोसेसिंग टाइम: प्रति वाहन टोल कटने का समय 10 सेकंड से अधिक नहीं होना चाहिए। तकनीकी खामियों और धीमी मशीनों के कारण यहाँ अक्सर मिनटों का इंतजार करना पड़ता है, जिसका खामियाजा सिर्फ यात्री भुगतते हैं।
3. जीरो टॉलरेंस के दोहरे मापदंड
आम जनता का सवाल जायज है कि सारे कायदे-कानून सिर्फ उनके लिए ही क्यों हैं?
- जनता पर सख्ती: यदि किसी यात्री के FASTag में बैलेंस कम हो या तकनीकी दिक्कत हो, तो उनसे तुरंत दोगुना (Double) जुर्माना वसूला जाता है। यहाँ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति तुरंत लागू हो जाती है।
- टोल प्रबंधन पर नरमी: जब टोल की मशीनें खराब होती हैं, सड़क पर गड्ढे होते हैं या स्ट्रीट लाइटें बंद होती हैं, तब टोल कंपनी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती? आखिर अव्यवस्था के लिए प्रबंधन की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जाती?
4. टोल कर्मियों की गुंडागर्दी और अभद्र व्यवहार
हाल के समय में लच्छीवाला टोल प्लाजा विवादों का केंद्र बना रहा है। स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के साथ टोल कर्मियों की तीखी बहस और हाथापाई की खबरें आम हो गई हैं:
- बाउंसरों जैसा रवैया: टोल पर तैनात कर्मचारी अक्सर मर्यादित भाषा के बजाय धमकाने वाले अंदाज में बात करते हैं।
- स्थानीय पास का विवाद: स्थानीय निवासियों को आईडी दिखाने के बावजूद परेशान किया जाता है, जिससे आए दिन झड़पें होती हैं।
5. निष्कर्ष: सिर्फ वसूली या बेहतर सुविधा भी?
टोल की दरें बढ़ाना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह जनता के साथ अन्याय है जब बढ़ी हुई कीमतों के बदले उन्हें बदसलूकी, लंबा जाम और धूल मिले। प्रशासन को चाहिए कि टोल कर्मियों को उचित ट्रेनिंग दी जाए और नियमों का उल्लंघन करने पर टोल कंपनी पर भी भारी जुर्माना लगाया जाए।
जनता की मांग: यदि हम टैक्स दे रहे हैं, तो हमें ‘सम्मानजनक सफर’ का अधिकार भी मिलना चाहिए। गुंडागर्दी और नियम विरुद्ध वसूली पर लगाम लगाना अब अनिवार्य हो गया है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई टोल दरें NHAI के पिछले वर्षों के वार्षिक संशोधन ट्रेंड्स (WPI आधारित) और प्रस्तावित वृद्धि की संभावनाओं पर आधारित हैं। आधिकारिक और अंतिम दरों की घोषणा 31 मार्च की मध्यरात्रि तक NHAI द्वारा अधिसूचना (Notification) के जरिए की जाएगी। पाठकों से अनुरोध है कि अंतिम दरों के लिए आधिकारिक वेबसाइट या टोल प्लाजा के सूचना पट्ट का संदर्भ लें। इस लेख का उद्देश्य जनहित में नियमों के प्रति जागरूकता और व्यवस्था में सुधार की अपील करना है।


