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सावधान! आपकी दरियादिली खाली कर सकती है बैंक खाता: सक्रिय हुआ इमोशनल बन लुटेरों का नया गैंग

डिजिटल डकैती का नया तरीका: आपकी 'इंसानियत' ही बन रही है आपकी सबसे बड़ी दुश्मन

देहरादूनब्यूरो ukcybernews:

​आजकल डिजिटल इंडिया के दौर में ठगों ने चोरी का ऐसा ‘इमोशनल’ तरीका निकाला है जिसे सुनकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। अब लुटेरे कट्टा या चाकू दिखाकर नहीं, बल्कि हाथ जोड़कर और गिड़गिड़ाकर आपकी गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो और हालिया शिकायतों ने एक ऐसे नए ‘साइबर स्कैम’ का पर्दाफाश किया है, जिसमें आपकी एक छोटी सी मदद आपको सड़क पर ला सकती है।

कैसे बुना जाता है ठगी का जाल? (पूरी कहानी)

​इस स्कैम की स्क्रिप्ट किसी फिल्मी कहानी जैसी लगती है, जिसमें शिकार आप और विलेन वह ‘लाचार’ व्यक्ति होता है जो आपके सामने खड़ा है।

  1. स्टेज सेटिंग (भीड़भाड़ वाला इलाका): ठग किसी बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन या मार्केट जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके को चुनते हैं। एक व्यक्ति फोन पर बात करने का नाटक करता है और अचानक उसके साथी (जो चोर बनकर आते हैं) उसका फोन छीनकर भाग जाते हैं।
  2. भावनात्मक जाल: फोन छिनने का नाटक करने वाला व्यक्ति जोर-जोर से रोने या चिल्लाने लगता है और आस-पास के लोगों से मिन्नतें करता है कि “मेरा फोन चोरी हो गया, कोई अपना फोन दे दो ताकि मैं अपने नंबर पर कॉल कर सकूं।”
  3. विश्वास जीतना: जब कोई ‘दरियादिल’ व्यक्ति उसे फोन देता है, तो वह पहले अपने ही बंद पड़े नंबर पर कॉल करता है। जब फोन नहीं मिलता, तो वह और ज्यादा घबराकर कहता है, “भाई साहब, सिम बंद करानी पड़ेगी वरना वो बैंक खाली कर देंगे, क्या एक कॉल पिताजी को कर लूं?”
  4. बैकएंड पर साइबर खेल: इसी बीच, जब वह आपसे बात कर रहा होता है या फोन कान पर लगाए होता है, वह बड़ी चालाकी से आपके फोन से एक गुप्त कोड या मैसेज अपने साइबर ठग साथियों को भेज देता है। इससे आपके फोन का एक्सेस या बैंकिंग मैसेजेस उनके पास फॉरवर्ड होने लगते हैं।
  5. OTP का खेल और सफाई: वह ‘पिताजी’ (जो असल में गैंग का हिस्सा है) से बात करता है और जोर-जोर से गाड़ी का नंबर बताने का नाटक करता है। इसी दौरान आपके फोन पर एक बैंक का OTP आता है, जिसे वह बड़ी चतुराई से पढ़कर अपने साथियों को बता देता है। जैसे ही वह आपको फोन वापस करता है, कुछ ही मिनटों में आपके मोबाइल पर मैसेज आता है— “Account Debited”

क्यों खतरनाक है यह स्कैम?

​इस अपराध की सबसे डरावनी बात यह है कि इसमें ठग आपके फोन को भौतिक रूप से छूता है। वह आपके सामने खड़ा होता है, इसलिए आपको शक नहीं होता। वह आपकी आंखों के सामने आपके फोन का इस्तेमाल ‘मदद’ के लिए कर रहा होता है, जबकि पर्दे के पीछे आपके बैंक खाते की सेंधमारी चल रही होती है।

Ukcybernews की विशेष सलाह: कैसे बचें?

  • अजनबियों को फोन न दें: चाहे स्थिति कितनी भी गंभीर क्यों न लगे, किसी अनजान व्यक्ति को अपना ‘अनलॉक’ फोन हाथ में न दें।
  • खुद कॉल करें: अगर आपको वाकई किसी की मदद करनी है, तो उससे नंबर पूछें और खुद स्पीकर पर डालकर बात करवाएं। फोन अपने हाथ में ही रखें।
  • मैसेज बॉक्स पर नजर: अगर कोई आपका फोन इस्तेमाल कर रहा है, तो ध्यान दें कि वह कोई मैसेज तो नहीं भेज रहा या कोई ऐप तो नहीं खोल रहा।
  • OTP शेयर न करें: याद रखें, बैंक ब्लॉक करने के लिए कभी किसी दूसरे नंबर पर OTP नहीं आता।

सीधी बात:-

आपकी एक गलती और चंद मिनटों की दरियादिली आपकी जिंदगी भर की कमाई छीन सकती है। सतर्क रहें, जागरूक रहें और इस खबर को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि कोई और इस ‘इमोशनल जाल’ में न फंसे।

 डिस्क्लेमर :-जनहित में जारी:

यह खबर केवल जन-जागरूकता (Public Awareness) और शिक्षा के उद्देश्य से प्रसारित की जा रही है। हमारा मकसद किसी को डराना या किसी विशिष्ट समुदाय को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि नए तरह के साइबर अपराधों के प्रति जनता को सतर्क करना है। पाठकों से अनुरोध है कि वे अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करने से पहले पूरी सावधानी बरतें।
* प्रतीकात्मक चित्रण: खबर के साथ इस्तेमाल की गई तस्वीरें और वीडियो प्रतीकात्मक (Representational) हो सकते हैं और इनका उद्देश्य केवल अपराध के तरीके (Modus Operandi) को समझाना है।
इस तरह के मामलों में साइबर सेल की भूमिका
इस तरह के ‘इमोशनल स्कैम्स’ और डिजिटल फ्रॉड से निपटने में ‘साइबर सेल’ (Cyber Cell) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक होती है:
* त्वरित शिकायत दर्ज करना (Registration of Complaint): अगर कोई व्यक्ति ऐसे किसी फ्रॉड का शिकार होता है, तो सबसे पहले उसे तुरंत नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर ऑनलाइन शिकायत करनी चाहिए।
* तकनीकी जाँच (Technical Investigation): साइबर सेल के पास उन्नत तकनीक और विशेषज्ञ होते हैं। वे ट्रांजैक्शन ट्रेल (पैसा कहाँ गया), उस नंबर की लोकेशन जिससे गुप्त मैसेज भेजे गए, और इस्तेमाल किए गए डिजिटल डिवाइस (जैसे अपराधी का वो फोन जो आपके फोन से ओटीपी ले रहा था) को ट्रैक करते हैं।
* फंड फ्रीज़ करना (Freezing the Funds): अगर घटना के तुरंत बाद (Golden Hour) शिकायत दर्ज की जाती है, तो साइबर सेल बैंक और पेमेंट गेटवे से संपर्क करके ठगे गए पैसे को अपराधी के खाते में फ्रीज़ कराने की कोशिश करती है, जिससे पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
* अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी (Identification and Arrest): तकनीकी सुरागों (IP Address, Phone Location, Bank Account details) के आधार पर साइबर सेल अपराधियों के पूरे नेटवर्क को बेनकाब करती है और उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करती है।
* डेटा रिकवरी और फोरेंसिक (Data Recovery & Forensics): यदि ठग ने पीड़ित के फोन से कोई निजी डेटा चोरी किया है या फॉरवर्ड किया है, तो साइबर सेल फॉरेंसिक टूल का उपयोग करके उस डेटा को ट्रैक करने और अपराधी के खिलाफ सबूत जुटाने का काम करती है।
* जन-जागरूकता अभियान (Awareness Campaigns): साइबर सेल समय-समय पर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से नए तरह के साइबर अपराधों के बारे में अलर्ट जारी करती है ताकि लोग जागरूक रहें।
नोट: यदि आप इस स्कैम के शिकार होते हैं, तो बिना देर किए अपने बैंक को सूचित करें और साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं।

UK Cyber News

Prem Padiyar

साइबर ठगी एवं डिजिटल अरेस्ट के कारण करोड़ों रुपयों की ठगी के मामले सामने आ रहे है, ये ठग अलग अलग माध्यम से लोगों को ठगते है। कभी पुलिस ऑफिसर बनकर, कभी कोरियर डिलीवरी बॉय बनकर, कभी बैंक कर्मचारी या कभी किसी सरकारी संस्थान के कर्मचारी बनकर, कभी ये राशन कार्ड / आधार कार्ड अपडेट तो कभी आयुष्मान कार्ड अपडेट के नाम पर लोगों को ठगते है, कभी मुसीबत में फंसे करीबी रिश्तेदार या दोस्त बनकर आमजन को ठगते हैं। इनसे बचने का एक मात्र तरीका जागरूकता है। इसके शिकार महिलाएं एवं बुजुर्ग ज्यादातर बनते है, हमारा उद्देश्य रहेगा कि समय समय पर आप लोगों तक साइबर क्राइम की जानकारी एवं सुरक्षा के उपाय पहुंचाया जाय, जिससे हर आदमी साइबर ठगी का शिकार होने से बच सके और अपनी गाढ़ी कमाई को बचा सके, साथ ही हमारी कोशिश रहेगी कि देश दुनिया की तमाम खबरें आप तक पहुंचाई जा सके।

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