
मंडल घाटी चमोली/ यूके साइबर न्यूज।।
माता अनुसूया मेला उत्तराखंड के चमोली जिले की मंडल घाटी में स्थित सती शिरोमणि मां अनसूया देवी के मंदिर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला एक प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। यह दो दिवसीय मेला आमतौर पर दिसंबर महीने में दत्तात्रेय जयंती के अवसर पर आयोजित होता है। मां अनसूया को संतान दायिनी देवी माना जाता है, इसलिए इस मेले का सबसे बड़ा महत्व संतान प्राप्ति की मनोकामना से जुड़ा हुआ है। देश भर से, खासकर महाराष्ट्र और कर्नाटक से, निसंतान दंपत्ति यहाँ विशेष रूप से आते हैं।
मेले में कई विशिष्ट पौराणिक और सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन किया जाता है बणद्वारा, देवलधार, कठूड़, सगर
और अन्य आस-पास के गाँवों की ज्वाला देवी (मां अनसूया की बहनें) की डोलियां ढोल-दमाऊं की थाप पर मंडल गांव से 5 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई तय कर अनसूया मंदिर पहुँचती हैं, जहाँ मां अनसूया की डोली से उनका अद्भुत मिलन होता है।
मेले के दौरान, निसंतान दंपत्ति (जिन्हें स्थानीय रूप से बरोई कहा जाता है) विशेष पूजा और अनुष्ठान में भाग लेते हैं। रात के समय, संतान की कामना करने वाली महिलाएं देव डोलियों के सामने बैठकर माता की स्तुति करती हैं और स्वप्न में देवी के दर्शन की प्रतीक्षा करती हैं। मान्यता है कि स्वप्न में फल दिखाई देने पर माता ने उनकी प्रार्थना सुन ली है और उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। सदियों से यह रात्रि जागरण की परंपरा चली आ रही है। इस मंदिर की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यहाँ अन्य मंदिरों की तरह बलि प्रथा का कोई प्रावधान नहीं है।श्रद्धालुओं को स्थानीय स्तर पर उगाए गए गेहूँ के आटे से बना विशेष प्रसाद दिया जाता है।
और अन्य आस-पास के गाँवों की ज्वाला देवी (मां अनसूया की बहनें) की डोलियां ढोल-दमाऊं की थाप पर मंडल गांव से 5 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई तय कर अनसूया मंदिर पहुँचती हैं, जहाँ मां अनसूया की डोली से उनका अद्भुत मिलन होता है।


