
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा उत्तराखंड के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह निर्णय ‘रिवर्स पलायन’ को केवल एक नारा न रखकर उसे धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा सकता है।
1. पिथौरागढ़ ही क्यों?
इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए पिथौरागढ़ का चयन रणनीतिक है। यह एक सीमांत जिला है, जहाँ को पलायन रोकना न केवल आर्थिक बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अनिवार्य है। ‘प्रवासी पंचायतों’ की शुरुआत यहाँ से होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में बसने के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ेगा।
2. ‘प्रवासी पंचायत’ का उद्देश्य
- विदेशों या देश के अन्य राज्यों में रह रहे प्रवासियों और सरकार के बीच एक सीधा सेतु बनाना।
- प्रवासियों को अपने गांव में निवेश या व्यवसाय शुरू करने में आने वाली प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना।
- सफल प्रवासियों के अनुभवों का लाभ उठाकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना।
3. राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- प्रवासियों की वापसी से ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।
- ‘वोकल फॉर लोकल’ को मजबूती मिलेगी और मंडुआ, झंगोरा जैसे पहाड़ी उत्पादों की मार्केटिंग बेहतर होगी।
- पलायन के कारण जो खेत बंजर हो गए थे, उनमें फिर से बागवानी और खेती की जा सकेगी।
4. सरकार की अन्य सहायक योजनाएं
- मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना
- वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना
- एप्पल मिशन और एरोमैटिक फार्मिंग
अगर यह मॉडल पिथौरागढ़ में सफल रहता है, तो अन्य 12 जिलों में इसे लागू करने से उत्तराखंड के खाली गांवों को फिर से आबाद करने में मदद मिलेगी।



