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लो जी हो गए “साहब सस्पेंड”

जोधपुर वकील दुर्व्यवहार मामला : हाईकोर्ट सख्त, SHO सस्पेंड

 

नई दिल्ली/जोधपुर:-जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाने में एक वकील के साथ कथित दुर्व्यवहार का वीडियो वायरल होने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। वकील भरत सिंह राठौड़ ने आरोप लगाया था कि बयान लेने के दौरान थाने में मौजूद एक पुलिसकर्मी बिना वर्दी के काम कर रहा था। जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई तो SHO हमीर सिंह ने न केवल उनसे बदसलूकी की, बल्कि धक्का-मुक्की करते हुए उनका कोट तक फाड़ दिया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद वकीलों में भारी आक्रोश फैल गया।

वकीलों का घेराव और विरोध प्रदर्शन

घटना के बाद बड़ी संख्या में वकील थाने के बाहर एकत्रित हुए और रातभर धरना दिया। अगले दिन वकीलों ने न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया, जिससे कोर्ट-कचहरी का कामकाज प्रभावित हुआ। वकील समुदाय ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

सोमवार को वीडियो देखने के बाद हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि थाने में वकील के साथ किया गया व्यवहार अस्वीकार्य है और पुलिस को यह समझना चाहिए कि वे जनता से कैसे संवाद करते हैं। कोर्ट ने पूछा कि नियमों के विरुद्ध थानों में बिना वर्दी काम क्यों होता है और ऐसी स्थितियाँ बार-बार क्यों उत्पन्न होती हैं।

SHO सस्पेंड – IPS अधिकारी से जांच

हाईकोर्ट ने तुरंत SHO हमीर सिंह को सस्पेंड करने और पूरे मामले की जांच एक वरिष्ठ IPS अधिकारी से कराने के निर्देश दिए। पुलिस कमिश्नर ने अदालत को बताया कि SHO के अलावा अन्य पुलिसकर्मियों को भी थाने से हटाया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि यह जांच एक सप्ताह के भीतर पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

सॉफ्ट-स्किल ट्रेनिंग अनिवार्य

हाईकोर्ट ने इस घटना को पुलिस-जनता संबंधों में एक गंभीर कमज़ोरी बताते हुए आदेश दिया कि पूरे पुलिस विभाग को ‘सॉफ्ट स्किल’ ट्रेनिंग दी जाए। अदालत ने कहा कि पुलिसकर्मियों को यह सीखने की आवश्यकता है कि जनता, वकीलों और शिकायतकर्ताओं से सम्मानजनक भाषा और व्यवहार में कैसे बात करनी है।

पुलिस-वर्क कल्चर पर सवाल

वीडियो में थाने में बिना वर्दी कर्मचारी द्वारा बयान लेने और SHO की धमकी-भरी भाषा से यह सवाल उठा कि पुलिस प्रणाली में नियमों का पालन, पारदर्शिता और अनुशासन किस स्तर पर लागू हो रहा है। कोर्ट का कहना था कि ऐसी घटनाएँ पुलिस-जनता के विश्वास को तोड़ती हैं और इन्हें रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

आगे क्या?

हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट उसके सामने होनी चाहिए। साथ ही दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और सुधारात्मक कदमों की विस्तृत जानकारी भी कोर्ट को देनी होगी।

वकील समुदाय ने कहा है कि वे तब तक आंदोलन जारी रखेंगे जब तक सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती।

UK Cyber News

Prem Padiyar

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Report By UK Cyber News