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स्किल इंडिया और AI: जानिए आपके राज्य में कितनों को मिली ट्रेनिंग, देखें आंकड़े

स्किल इंडिया और AI का महा-अभियान: जानिए कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बदल रही है भारत के युवाओं की तकदीर

नई दिल्ली:

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा और क्लाउड कंप्यूटिंग—ये सिर्फ आधुनिक शब्द नहीं हैं, बल्कि यह भविष्य का वो सच हैं जो भारत के रोजगार बाज़ार को तेजी से बदल रहे हैं। देश के युवाओं को भविष्य की इन तकनीकी चुनौतियों और नए अवसरों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से भारत सरकार का स्किल इंडिया मिशन (Skill India Mission) एक नए अवतार में सामने आया है।

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (MSDE) द्वारा संसद में साझा की गई ताज़ा जानकारी के अनुसार, सरकार अब पारंपरिक ट्रेड के साथ-साथ ‘फ्यूचर स्किल्स’ (भविष्य के कौशल) पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही है। देश भर के राज्यों में युवाओं को AI और उभरती तकनीकों में ट्रेनिंग देकर उन्हें सीधे कंपनियों और उद्योगों की ज़रूरतों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है।


भविष्य की नौकरियों के लिए देश भर में बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क

भारत सरकार का उद्देश्य केवल युवाओं को डिग्री या सर्टिफिकेट देना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसा व्यावहारिक कौशल (Hands-on Training) देना है जिससे वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें। इसके लिए कई बड़ी और व्यापक योजनाएं एक साथ काम कर रही हैं:

1. PMKVY 4.0 (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना)

वित्तीय वर्ष 2022-23 से शुरू की गई PMKVY 4.0 में ‘इंडस्ट्री 4.0’ की आवश्यकताओं पर सबसे ज्यादा ज़ोर दिया गया है। इसके तहत AI, मशीन लर्निंग (ML), ड्रोन टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिटिक्स, रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे डोमेन में ट्रेनिंग दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को आधुनिक करियर विकल्पों और मार्गदर्शन से सशक्त बनाना है।

2. ITI और NSTI में नए ज़माने के कोर्स

प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) ने नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (NSQF) के तहत 32 नए ज़माने के कोर्स तैयार किए हैं। इनमें 5G नेटवर्क तकनीशियन, AI प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, साइबर सिक्योरिटी असिस्टेंट और ड्रोन तकनीशियन जैसे विशेष ट्रेनिंग मॉड्यूल शामिल हैं। ये कोर्स देश भर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) के माध्यम से संचालित हो रहे हैं।

3. टेक दिग्गजों के साथ सीधी साझेदारी

उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच की दूरी को खत्म करने के लिए MSDE ने विश्व प्रसिद्ध IT कंपनियों जैसे IBM, Microsoft, Cisco और Amazon Web Services (AWS) के साथ समझौते (MoU) किए हैं। ये साझेदारियां यह सुनिश्चित करती हैं कि युवाओं को जो पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है, वह वास्तविक कॉर्पोरेट दुनिया की मांगों से पूरी तरह मेल खाता हो।

4. PM-SETU योजना और ₹60,000 करोड़ का कायाकल्प

सरकार ने ₹60,000 करोड़ के भारी-भरकम बजट से ‘PM-SETU’ (उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल विकास और रोजगार क्षमता में परिवर्तन) योजना शुरू की है। इसके तहत देश भर की 1,000 सरकारी ITI (200 हब और 800 स्पोक ITI) का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं को भी विश्वस्तरीय लैब और प्रैक्टिकल एनवायरनमेंट मिल सके।


📊 राज्यवार विश्लेषण: कहाँ कितने युवाओं को मिली AI और आधुनिक स्किल्स की ट्रेनिंग?

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों से साफ होता है कि देश के उत्तर से लेकर दक्षिण तक, AI और टेक-स्किलिंग का क्रेज तेजी से बढ़ा है। आइए तीनों प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत राज्यों की स्थिति का विस्तार से विश्लेषण करते हैं:


1. PMKVY 4.0: भविष्य के कौशलों में प्रशिक्षित उम्मीदवारों का ब्योरा

PMKVY 4.0 के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में ट्रेनिंग का एक बड़ा उछाल देखा गया। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने इस मामले में अग्रणी भूमिका निभाई है।

राज्य / केंद्र शासित प्रदेश 2022-23 2023-24 2024-25 2025-26 2026-27 (30 जून तक)
उत्तर प्रदेश 2,079 88,868 6,672 5,563
राजस्थान 1,106 84,144 2,707 329
मध्य प्रदेश 3,229 67,064 5,260 2,588
बिहार 846 28,590 1,049 341
कर्नाटक 694 24,280 4,259 681
तमिलनाडु 2,717 22,645 7,086 280
पंजाब 630 22,290 3,356 12,296
हरियाणा 275 14,047 1,030 704
जम्मू और कश्मीर 1,383 11,854 1,375 281
तेलंगाना 1,016 10,646 3,831 1,257
उत्तराखंड 351 7,697 616 146
आंध्र प्रदेश 418 7,569 841 1,308
गुजरात 465 6,377 327 371
दिल्ली 180 1,432 563 253

मुख्य आकर्षण: आंकड़े दर्शाते हैं कि 2024-25 के दौरान उत्तर प्रदेश (88,868), राजस्थान (84,144) और मध्य प्रदेश (67,064) में लाखों की संख्या में युवाओं ने AI और आधुनिक शॉर्ट-टर्म टेक कोर्स में रुचि दिखाई और ट्रेनिंग पूरी की।


2. CTS / ITI: शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के तहत AI व डिजिटल ट्रेड में दाखिले

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) में पारंपरिक कोर्स से हटकर AI और सॉफ्टवेयर-आधारित ट्रेडों में छात्रों का रुझान वर्ष 2023 और 2024 के बाद रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है।

राज्य / केंद्र शासित प्रदेश 2019 2020 2021 2022 2023 2024 2025
तेलंगाना 64 8 36 134 566 3,134 11,629
उत्तर प्रदेश 239 152 156 172 398 6,048 8,139
तमिलनाडु 175 189 235 470 7,470 6,047 7,082
कर्नाटक 35 21 3,282 5,552 5,956 4,052 5,826
महाराष्ट्र 195 145 210 322 650 785 3,113
ओडिशा 134 243 216 735 1,323 1,385 1,876
झारखंड 8 19 46 34 391 368 587
बिहार 32 111 17 143 209 434 491
मध्य प्रदेश 13 1 4 0 118 219 431
राजस्थान 82 33 67 82 194 329 385
दिल्ली 16 0 14 0 23 175 269

विश्लेषण: तेलंगाना और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में ITI के माध्यम से AI-केंद्रित पाठ्यक्रमों में दाखिले की संख्या में वर्ष 2024 और 2025 में बहुत बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। तेलंगाना में यह संख्या 2023 के 566 से बढ़कर 2025 में 11,629 तक पहुंच गई।


3. NAPS: नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग)

केवल थ्योरी पढ़ना काफी नहीं होता, इसलिए NAPS के तहत युवाओं को टेक कंपनियों में सीधे व्यावहारिक काम (Apprenticeship) करने का अवसर और स्टाइपेंड मिलता है।

राज्य / केंद्र शासित प्रदेश 2022-23 2023-24 2024-25 2025-26 2026-27
महाराष्ट्र 859 4,163 2,073 1,713 203
कर्नाटक 144 152 324 1,895 181
गुजरात 120 514 892 1,205 175
उत्तर प्रदेश 83 29 95 866 150
हरियाणा 5 299 373 530 97
तमिलनाडु 322 471 361 448 75
मध्य प्रदेश 16 47 44 674 65
तेलंगाना 12 24 323 735 55
राजस्थान 0 20 213 726 49
दिल्ली 40 1 26 79 46

ट्रेंड: औद्योगिक और आईटी हब वाले राज्यों जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में अप्रेंटिसशिप (NAPS) के जरिए उद्योगों में सीधे प्रैक्टिकल ट्रेनिंग लेने वाले उम्मीदवारों की संख्या सबसे अधिक रही है।


🔍 रोजगार क्षमता और उद्योग की मांग को कैसे मापा जा रहा है?

स्किल ट्रेनिंग के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि युवाओं को ट्रेनिंग के बाद रोजगार के अवसर मिलें। इसके लिए मंत्रालय कई रणनीतिक कदम उठा रहा है:

  1. स्किल गैप स्टडी (Skill Gap Study): इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में ‘सेक्टर स्किल कौंसिल’ (SSC) समय-समय पर स्किल गैप का अध्ययन करती है। इससे यह पता चलता है कि बाज़ार में किस तरह के हुनरमंद युवाओं की मांग ज्यादा है।

  2. राष्ट्रीय कौशल अंतर अध्ययन (संकल्प योजना): ‘संकल्प’ योजना के तहत नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) द्वारा किए गए अध्ययन ने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और IT सेक्टर सहित 7 बड़े विकास क्षेत्रों में मांग और आपूर्ति के अंतर को मापने का एक डेटा-संचालित ढांचा तैयार किया है।

  3. जिला स्तर पर DSC की भूमिका: जिला कौशल समितियां (DSC) स्थानीय स्तर पर यह पहचान करती हैं कि किस जिले या क्षेत्र में किस प्रकार के रोजगार के अवसर बन रहे हैं, ताकि वहां के युवाओं को उसी दिशा में ट्रेन किया जा सके।

  4. रोजगार और कौशल मेले (PMNAM): देश भर में आयोजित होने वाले ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता मेलों’ (PMNAM) और कौशल मेलों के ज़रिए ट्रेनिंग पूरी कर चुके उम्मीदवारों को सीधे एम्प्लॉयर्स और प्राइवेट कंपनियों से मिलाया जाता है, जिससे उन्हें तुरंत जॉब या अप्रेंटिसशिप मिल सके।


डिजिटल भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका

स्किल इंडिया मिशन का यह आधुनिक बदलाव इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल एक पारंपरिक कार्यबल (Workforce) तैयार नहीं कर रहा, बल्कि डिजिटल और AI क्रांति का नेतृत्व करने वाले कुशल युवाओं की फौज तैयार कर रहा है। सरकारी पहलों, प्राइवेट टेक-दिग्गजों के सहयोग और आधुनिक ITI नेटवर्क के संगम से आने वाले वर्षों में भारतीय युवाओं के लिए देश और विदेश दोनों जगह नौकरियों के नए द्वार खुलने तय हैं।

नोट: यह रिपोर्ट प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों और प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर तैयार की गई है। भारत सरकार के ‘स्किल इंडिया मिशन’ और AI/डिजिटल कौशल से जुड़ी यह पहल देश के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय व दूरदर्शी कदम है। यह खबर पाठकों की जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।
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Prem Padiyar

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Report By UK Cyber News