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नेपाल बॉर्डर पर ‘भंसार’ की सख्ती: आम नागरिक पर भारी

क्या सरकार के लिए बनेगा मुसीबत का सबब?

पिथौरागढ़/झूलाघाट: भारत-नेपाल सीमा पर पिछले कुछ दिनों से नेपाल प्रशासन द्वारा अपनाई जा रही सख्ती चर्चा का विषय बनी हुई है। 50 साल पुराने ‘भंसार’ (सीमा शुल्क) नियमों का हवाला देकर जिस तरह से आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है, वह न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि व्यवस्था पर कई सवाल भी खड़े कर रहा है।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में एक मामला सामने आया, जहाँ बाजुरा निवासी कमल कार्की को अपनी ही खरीदी हुई शादी की शॉल दोबारा ‘नीलामी’ में ऊंची कीमत पर खरीदनी पड़ी। सुरक्षा बलों ने उनके सामान को ‘लावारिस’ बताकर जब्त कर लिया और उन्हें भारी जुर्माना और नीलामी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों सीमावर्ती लोगों का दर्द है जो छोटी-मोटी खरीदारी के लिए सीमा पार करते हैं।

सख्ती या घाटे का सौदा?

नेपाल सरकार का यह फैसला आर्थिक सुधारों के नाम पर हो सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। नेपाल अभी हाल के ‘जेन्ज’ (Zenz) आंदोलन और उसके बाद की अस्थिरता से उबरने की कोशिश कर रहा है। ऐसे संवेदनशील दौर में, जब देश की अर्थव्यवस्था और जनता का मनोबल पटरी पर लौटने की राह देख रहा है, छोटे दुकानदारों और सामान्य नागरिकों पर इतनी सख्ती करना समझ से परे है।

​यह सख्ती सरकार के लिए ‘घाटे का सौदा’ साबित हो सकती है, इसके पीछे कुछ ठोस कारण हैं:

  1. जन-अविश्वास: आम नागरिकों को अपराधी की तरह ट्रीट करना सरकार और जनता के बीच की खाई को और बढ़ाएगा।
  2. सीमावर्ती व्यापार पर असर: भारत-नेपाल सीमा के दोनों ओर के बाजार एक-दूसरे पर निर्भर हैं। व्यापारिक गतिविधियों को बाधित करने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा, जिससे बेरोजगारी और महंगाई जैसी समस्याएं और विकराल हो सकती हैं।
  3. गलत समय का चुनाव: एक देश जो अभी अपने आंतरिक आंदोलनों के घावों को भर रहा है, वहां आम जनता की छोटी जरूरतों को निशाना बनाना ‘सुशासन’ नहीं, बल्कि ‘अहंकार’ की निशानी माना जा सकता है।

​सरकार को यह समझना होगा कि रेवेन्यू जुटाने के और भी तरीके हो सकते हैं, न कि गरीब आदमी की शादी की शॉल जब्त करना। अगर यह सख्ती जारी रही, तो नेपाल सरकार को आने वाले समय में जनता के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है, जो किसी भी नई सरकार के लिए शुभ संकेत नहीं है।

अस्वीकरण Disclaimer

यह लेख केवल जनहित और सूचना के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। ‘UK Cyber News’ का उद्देश्य किसी भी देश की सरकार, प्रशासन या सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली पर नकारात्मक टिप्पणी करना नहीं है, बल्कि सीमावर्ती निवासियों की वास्तविक समस्याओं को प्रशासन के संज्ञान में लाना है। इस लेख में दी गई जानकारी जमीनी रिपोर्टिंग और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुभव पर आधारित है।

​पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे सीमा संबंधी नियमों और कस्टम ड्यूटी (भंसार) के नवीनतम निर्देशों के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या सीमा चौकी पर ही जानकारी प्राप्त करें। किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत या व्यापारिक निर्णय लेने से पूर्व आधिकारिक नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इसमें व्यक्त किए गए विचार पूर्णतः पत्रकारिता के मानदंडों के अनुरूप एक संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करने का प्रयास हैं।

UK Cyber News

Prem Padiyar

साइबर ठगी एवं डिजिटल अरेस्ट के कारण करोड़ों रुपयों की ठगी के मामले सामने आ रहे है, ये ठग अलग अलग माध्यम से लोगों को ठगते है। कभी पुलिस ऑफिसर बनकर, कभी कोरियर डिलीवरी बॉय बनकर, कभी बैंक कर्मचारी या कभी किसी सरकारी संस्थान के कर्मचारी बनकर, कभी ये राशन कार्ड / आधार कार्ड अपडेट तो कभी आयुष्मान कार्ड अपडेट के नाम पर लोगों को ठगते है, कभी मुसीबत में फंसे करीबी रिश्तेदार या दोस्त बनकर आमजन को ठगते हैं। इनसे बचने का एक मात्र तरीका जागरूकता है। इसके शिकार महिलाएं एवं बुजुर्ग ज्यादातर बनते है, हमारा उद्देश्य रहेगा कि समय समय पर आप लोगों तक साइबर क्राइम की जानकारी एवं सुरक्षा के उपाय पहुंचाया जाय, जिससे हर आदमी साइबर ठगी का शिकार होने से बच सके और अपनी गाढ़ी कमाई को बचा सके, साथ ही हमारी कोशिश रहेगी कि देश दुनिया की तमाम खबरें आप तक पहुंचाई जा सके।

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Report By UK Cyber News