कर्णप्रयाग विवाद: पुलिस की सख्त कार्रवाई और हेमकुंड साहिब ट्रस्ट का शांति संदेश

कर्णप्रयाग, चमोली:
जनपद के कर्णप्रयाग बाजार में श्री हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों के बीच हुई एक हिंसक घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी, जिसे प्रशासन और पुलिस ने तत्परता से नियंत्रित किया है। इस घटना में चार स्थानीय लोग घायल हुए हैं, जिनमें से एक को एयर एम्बुलेंस से देहरादून भेजा गया है।
इस घटना के बाद चमोली पुलिस की सख्त कार्रवाई और हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा प्रबंधन ट्रस्ट का शांति संदेश दोनों ही अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
पुलिस प्रशासन का सख्त रुख: गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं
एसपी चमोली सुरजीत सिंह पँवार ने इस घटना पर स्पष्ट और सख्त चेतावनी जारी की है:
- कानूनी कार्रवाई: वादी गजपाल सिंह की तहरीर पर कोतवाली कर्णप्रयाग में गंभीर धाराओं (मु0अ0सं0-17/2026) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से चारों आरोपी निहंग यात्रियों को हिरासत में ले लिया है।
- सख्त चेतावनी: एसपी ने स्पष्ट किया है कि जनपद में कानून-व्यवस्था भंग करने, गुंडागर्दी करने अथवा आमजन की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
- सतत निगरानी: पुलिस द्वारा पूरे क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखी जा रही है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
हेमकुंड साहिब ट्रस्ट का संदेश: संयम और मर्यादा ही यात्रा की पहचान
घटना के बाद हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा प्रबंधन ट्रस्ट के प्रतिनिधि ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से पूरे घटनाक्रम पर दुख व्यक्त करते हुए संगत से विशेष अपील की है:
- मर्यादा में रहें: प्रबंधन ने कहा कि हेमकुंड साहिब की यात्रा लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। उन्होंने यात्रियों से विनती की कि वे यात्रा के दौरान पूर्ण संयम, विनम्रता और धैर्य का परिचय दें।
- कानून को हाथ में न लें: प्रबंधन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि यात्रा के दौरान कहीं गाड़ी छूने, टायर पंचर होने या स्थानीय लोगों के साथ मामूली कहासुनी जैसा कोई भी विवाद हो, तो यात्रियों को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। प्रशासन और पुलिस हर जगह मौजूद है, उन्हीं की मदद लेनी चाहिए।
- शस्त्रों का प्रदर्शन शोभा नहीं देता: सबसे महत्वपूर्ण बात रखते हुए कहा कि गुरु साहिब ने शस्त्र ‘मजलूमों’ (पीड़ितों) की रक्षा के लिए दिए थे, न कि कहीं भी विवाद में उनका प्रदर्शन करने के लिए। यात्रा के दौरान तलवार या गंडासे जैसे बड़े धारदार हथियार लेकर चलना या उनका प्रदर्शन करना शोभा नहीं देता और इससे आम लोगों में डर पैदा होता है।
स्थानीय लोगों का सहयोग करें: प्रबंधन ने स्थानीय निवासियों से भी अपील की कि वे यात्रियों का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि हमारा कर्तव्य है कि हम मिलकर उत्तराखंड में शांति और भाईचारे का संदेश दें, ताकि आने वाले समय में और अधिक श्रद्धालु यहाँ आ सकें।



