क्राइमटेक्नोलॉजीदेशविदेशसाइबर क्राइम न्यूज़

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंट (AI) से बढ़ते जा रहे अपराध

नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को ठगा जा रहा है साथ ही मानव तस्करी भी

एक तरफ दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस दुनिया के साथ भारत में भी काफी फायदे मंद है सातभारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते दुरुपयोग के चलते साइबर अपराधों की संख्या भयानक रूप से बढ़ी है, जहां अपराधी खासतौर पर नौजवानों को फर्जी नौकरियों के लालच में फंसाकर आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार की हानि पहुंचा रहे हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में लगभग 25,000 लोग ‘नौकरी’ के नाम पर गायब हो चुके हैं। ये लोग सोशल मीडिया पर ठगी के जाल में फंसे, जहां एआई-जनित नकली चेहरों और उपजीवित चैटबॉट्स द्वारा भरोसा कायम कर उन्हें विदेशी नौकरी का झांसा दिया जाता है। यह एक बहुत ही गंभीर समस्या बन चुकी है, जिससे परिवारों की खुशियों पर काला साया पड़ा है।रिकॉर्ड के लिए, इस प्रकार के जालसाजी में अपराधी “thispersondoesnotexist.com” जैसे प्लेटफ़ॉर्म से नकली फेस जनरेट करते हैं, जिन्हें एआई चैटबॉट नियंत्रित करते हैं। ये चैटबॉट पीड़ित के साथ गहरी बातचीत कर विश्वास जुटाते हैं और धीरे-धीरे उन्हें फर्जी नौकरी का लालच देकर आर्थिक धोखाधड़ी के साथ-साथ मानव तस्करी के लिए भी झोंक देते हैं। युवाओं में खासतौर पर सोशल मीडिया पर सक्रियता का दुरुपयोग करके उन्हें इस प्रक्रिया का शिकार बनाया जाता है।एक वास्तविक उदाहरण में, कर्नाटक की एक छात्रा को “डिजिटल गिरफ्तारी” का झांसा दिया गया, जिसमें कहा गया कि उसका नंबर अवैध गतिविधियों में शामिल है। वह इतनी दहशत में आ गई कि उसने तुरंत जमानत का पैसा ट्रांसफर कर दिया, जबकि यह पूरी प्रक्रिया फर्जी थी। इसी तरह, उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ नागरिक को उसके बेटे की गिरफ्तारी की आवाज सुनाई गई, जो असल में उसकी आवाज़ की नक़ल थी—आखिरकार उसे अपनी गलती का अहसास तब हुआ जब उसने अपने बेटे से संपर्क किया।साइबर अपराधियों का यह खेल इतना उन्नत हो गया है कि आरबीआई ने भी डिजिटल भुगतान में एआई-पावर्ड इंटेलिजेंस सिस्टम (DPIP) लॉन्च किया है, जो वास्तविक समय में फ्रॉड को पकड़ने की क्षमता रखता है। साथ ही, भारत सरकार और साइबर अपराध विभाग ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए तकनीकी निगरानी और समझौतों को बढ़ावा दे रहे हैं।विशेषज्ञों का सुझाव है कि केवल जागरूकता ही नहीं, बल्कि एआई आधारित एप्लिकेशन के लिए कड़े सत्यापन उपाय होने चाहिए। उदाहरण के लिए, डिजिटल हस्ताक्षरों के लिए लाइव वीडियो सत्यापन आवश्यक हो, साथ ही आधार कार्ड जैसे सरकारी पहचान पत्र भी जुड़े हों, ताकि अपराधियों की गतिविधि को ट्रेस किया जा सके।यह तथ्य चौंकाने वाला है कि डीपफेक वीडियो, वॉयस क्लोनिंग और फर्जी कॉल्स के माध्यम से साइबर अपराधी दिन-ब-दिन अपना दायरा बढ़ा रहे हैं। भारत में 2024 में साइबर फ्रॉड के कारण करीब ₹23,000 करोड़ का नुकसान हुआ है, जिससे स्पष्ट होता है कि कितनी गंभीर और व्यापक यह समस्या है। साइबर सुरक्षा अधिकारी लगातार इन जालसाजी के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन आम जनता की सतर्कता और मजबूत सुरक्षा बनाए रखना अब ज़्यादा जरूरी हो गया है।इस व्यापक विषय पर गहरी जानकारी और जागरूकता के लिए यह लेख UKCYBERNEWS द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जो भारत और विश्व में साइबर सुरक्षा के जमीनी सच को सामने लाने का प्रयास करता है।यदि आप या आपके जानने वाले इस तरह की धोखाधड़ी के शिकार हों, तो तत्काल साइबर क्राइम पोर्टल और संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें ताकि कार्रवाई हो सके। सावधानी, सतर्कता और सही जानकारी की ही इस डिजिटल युग में रक्षा है।

UK Cyber News

Prem Padiyar

साइबर ठगी एवं डिजिटल अरेस्ट के कारण करोड़ों रुपयों की ठगी के मामले सामने आ रहे है, ये ठग अलग अलग माध्यम से लोगों को ठगते है। कभी पुलिस ऑफिसर बनकर, कभी कोरियर डिलीवरी बॉय बनकर, कभी बैंक कर्मचारी या कभी किसी सरकारी संस्थान के कर्मचारी बनकर, कभी ये राशन कार्ड / आधार कार्ड अपडेट तो कभी आयुष्मान कार्ड अपडेट के नाम पर लोगों को ठगते है, कभी मुसीबत में फंसे करीबी रिश्तेदार या दोस्त बनकर आमजन को ठगते हैं। इनसे बचने का एक मात्र तरीका जागरूकता है। इसके शिकार महिलाएं एवं बुजुर्ग ज्यादातर बनते है, हमारा उद्देश्य रहेगा कि समय समय पर आप लोगों तक साइबर क्राइम की जानकारी एवं सुरक्षा के उपाय पहुंचाया जाय, जिससे हर आदमी साइबर ठगी का शिकार होने से बच सके और अपनी गाढ़ी कमाई को बचा सके, साथ ही हमारी कोशिश रहेगी कि देश दुनिया की तमाम खबरें आप तक पहुंचाई जा सके।

Related Articles

Back to top button
Report By UK Cyber News