
दुनिया/उत्तराखण्ड/ यूके साइबर न्यूज/17/11/2025:
डिजिटल युग की चुनौती: डीपफेक (Deepfake) और सोशल इंजीनियरिंग
डीपफेक (Deepfake) तकनीक का उपयोग करके बनाए गए नकली वीडियो, ऑडियो या छवियां अब बेहद वास्तविक लगने लगे हैं। यह डिजिटल फॉर्मेट में झूठी जानकारी फैलाने, लोगों को भ्रमित करने और सामाजिक विश्वास को तोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। सोशल इंजीनियरिंग, यानी लोगों की भावनाओं और विश्वासों का दुरुपयोग कर गोपनीय जानकारियां हासिल करना, साइबर अपराध का एक दूसरा बढ़ता रूप है।

डीपफेक और सोशल इंजीनियरिंग के कम जाहिर लेकिन प्रभावशाली उदाहरण
– हाल ही में, एक क्लाइंट ने अपने प्रबंधक का वीडियो देखा जिसमें वे गुप्त मुनाफे के लिए एक अनजान खाते में पैसा ट्रांसफर करने का आदेश दे रहे थे। पर जांच में पता चला कि यह वीडियो एक उच्च गुणवत्ता वाला डीपफेक था, जिसे साइबर अपराधियों ने बनाया था।
– एक परिवार के सदस्य को फोन करके धोखेबाज ने बैंक कर्मचारी बनकर उनके खाते की सुरक्षा के लिए तत्काल OTP माँगा, जो वास्तव में चुराया गया था।

– सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर दोस्तों से संपर्क कर पैसा उगाही की कई घटनाएं सामने आई |
बचाव के लिए जरूरी कदम
1. स्रोत की पुष्टि करें
किसी भी संदेहास्पद वीडियो, लिंक या कॉल को तुरंत न मानें। वैधता जांचने के लिए उपलब्ध मेडिया वेरिफिकेशन टूल्स का इस्तेमाल करें।
2. संवेदनशील जानकारी न साझा करें
OTP, पासवर्ड, बैंक जानकारी कभी भी फोन या मैसेज पर साझा न करें, चाहे सामने वाला कितना भी भरोसेमंद क्यों न लगे।
3. दो-चरणीय प्रमाणीकरण (2FA) अपनाएं
अपने सभी महत्त्वपूर्ण ऑनलाइन अकाउंट्स में 2FA सक्रिय करें ताकि हैकिंग का जोखिम कम हो।
4. तकनीक का सहारा लें
Microsoft Video Authenticator, Deepware Scanner जैसे AI टूल्स का उपयोग करें जो डीपफेक सामग्री की पहचान कर सकें।
5. सावधानीपूर्वक सोशल मीडिया उपयोग करें
अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल की जानकारी सीमित करें और अनजान लोगों से सावधानी से संबंध बनाएं।
6. सामाजिक जागरूकता बढ़ाएं
परिवार, मित्र और विशेष रूप से बुजुर्गों को इन खतरे और बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक करें।

टेक्नोलॉजी पर भरोसा, लेकिन सतर्कता बनाए रखें
डीपफेक और सोशल इंजीनियरिंग जैसे डिजिटल अपराध तेजी से उभर रहे हैं। हालांकि AI और डिजिटल फॉरेंसिक्स क्षेत्रों में नई तकनीकें इन अपराधों को पकड़ने के लिए विकसित हो रही हैं, फिर भी अंतिम जिम्मेदारी हर यूजर की है कि वे सतर्क और समझदार रहें।
डिजिटल दुनिया की इस नई चुनौती से बचने के लिए ज्ञान और सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है। इसलिए, सचेत रहें, सुरक्षित रहें!



